Notice: Function _load_textdomain_just_in_time was called incorrectly. Translation loading for the jnews domain was triggered too early. This is usually an indicator for some code in the plugin or theme running too early. Translations should be loaded at the init action or later. Please see Debugging in WordPress for more information. (This message was added in version 6.7.0.) in /home/u148675077/domains/rashtriyapatal.com/public_html/wp-includes/functions.php on line 6114
अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति के सन्त बाबा नीम करौली-कैंची धाम – Rashtriya Patal
  • About
  • Advertise
  • Privacy & Policy
  • Contact
Social icon element need JNews Essential plugin to be activated.
Rashtriya Patal
Advertisement
  • होम
  • अंतराष्ट्रीय
  • राष्ट्रीय
    • उत्तरप्रदेश
  • खेल
  • मनोरंजन
  • योजनाएं
  • सैर सपाटा
  • स्वास्थ्य
No Result
View All Result
  • होम
  • अंतराष्ट्रीय
  • राष्ट्रीय
    • उत्तरप्रदेश
  • खेल
  • मनोरंजन
  • योजनाएं
  • सैर सपाटा
  • स्वास्थ्य
No Result
View All Result
Rashtriya Patal
No Result
View All Result

अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति के सन्त बाबा नीम करौली-कैंची धाम

मधुसूदन नायर "अकेले का वो सफर" (अप्रकाशित ) से लिया गया

डॉ. मधुसूदन नायर by डॉ. मधुसूदन नायर
26/07/2021
in feature, उत्तरांचल, सैर सपाटा
0
अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति के सन्त बाबा नीम करौली-कैंची धाम

कैची धाम के बारे में पता चला सुन सुन के जाने को मन विचलित हो गया जैसा प्रायः होता आया है जब मैंने कोई प्रोग्राम बनाया तो हो ही नहीं पाया इसलिए जब मन करता था तो निकल पड़ता हु रास्ते की जानकारी तो थी नहीं धन्यवाद गूगल मैप का जिससे तुरंत रास्ते का मैप निकाला

जिससे पता चला की तकरीबन 750 K.M तक ड्राइव करना हैं और रूट मैप का स्क्रीन शॉट भी ले कर के रख लिया जिससे की आगे बार-बार नेट नहीं चलाना पड़े। जाने का फैसला अकेले ही किया क्यूंकी इतना समय नहीं था की किसी और को साथ ले लूँ और वैसे भी मुझे अकेले घूमना पसंद हैं इससे आज़ादी का एहसास होता हैं जहां आपकी इच्छा हों आप जा सकते हैं जहां रुकना चाहे रुक सकते हैं किसी और की चिंता किए बगैर।

 

सुबह ५ बजे अपने घर आजमगढ़ से निकल लिया साफ मौसम था सुबह के १० बजते बजते लखनऊ पहुंच चूका था काफी सफर करना लखनऊ बिना रुके मैंने अपनी कार NH 30 से अपनी मंजिल की और आगे बढ़ने लगा , शहरी कस्बा भी, अब हाइवे था और ऊसके दोनों तरफ खेत थोड़े बहोत मकान भी थे हाइवे के किनारे वहीं आगे जा करके एक चौक था

जहां कई दुकाने थी पेड़ के नीचे एक जूस वाले की दुकान थी वहीं पर थोड़ा देर रुक कर के जूस पिया और थोड़ा आराम करने के बाद आगे का रास्ता तय करने के लिए फिर से ड्राइव करना शुरू कर दिया ऊसके बाद संडीला ,हरदोई होते हुए शाहजहांपुर पंहुचा श्याम के करीब सोचा था की किच्छा में रात बिताइए जाएगी चुकी एक हाथ से गाड़ी चलना दूसरे हाथ से होटल तलासना काफी मुसकित काम था

ड्राइव करते करते कब किच्छा पहुंच गया पता ही नहीं चला चुकी दिन अभी बाकि था तो सोचा की चलते रहो जितनी दूरी तय कर लूंगा मंजिल उतनी करीब हो जाएगी अब हल्द्वानी को ही ठिकाना बनाने को सोच रहा था अब श्याम के ६ बज रहे थे हम हल्द्वानी चुने लगे रस्ते

में ही एक बढ़िया रेसॉर्ट नजर आया चुकी थकन भी हो चुकी थी सो सोचा की यही रुक लिया किराया थोड़ा ज़्यादा लगा Rs.1200/- एक रात का लेकिन कमरा अच्छा था साथ मैं अटैच बाथरूम भी था रात को नहा कर के खाना कमरे मैं ही मँगवा लिया, रोटी, चावल, आलू की सब्जी और दाल मखनि का भोजन कर के एक पेप्सी पी और टीवी पर एक पिक्चर देखने लगा यह सोचते हुये की कल सुबह जल्दी निकलना पड़ेगा।

अगले दिन सुबह 6:00 बजे ऊठा और नहा धो कर के 7:00 बजे होटल से आगे के सफर के लिए निकल पड़ा तकरीबन 20 K.M. पहाड़ो पे बाइक चला कर के मैं पहुंचा भीमताल और यह जगह काफी शांत और खूबसूरत हैं जहां आपको पहाड़ और प्रकृति की खूबसूरती का एहसास भी होगा और यह जगह किसी मशहूर पर्यटन स्थल की तरह भीड़-भाड़ वाली भी नहीं हैं,

एक खूबसूरत कस्बा हैं जहां आप शांति के कुछ पल एक शांत और खूबसूरत वातावरण मैं बिता सकते हैं। मैंने यहाँ पे कार को एक साइड मैं लगा कर के कुछ देर तक इस खूबसूरत नज़ारे को देखता रहा और फिर आगे का रास्ता शुरू किया चुकी रस्ते बहुत ही

शानदार नज़ारे दिखा रहे थे ड्राइविंग करने ने बहुत आनंद आ रहा था कब रास्ता काट गया पता ही नहीं चला में भवाली क्रॉस कर रहे थे  यहाँ से कैंची धाम 8 K.M. हैं और नैनीताल 10 K.M. आपको कैंची धाम के दर्शन कर के यहीं वापस आना होगा और फिर आप यहाँ से नैनीताल जा सकते हैं

और मैंने आगे का रास्ता कैंची धाम के लिए शुरू किया जो की 8 K.M. का था मैंने लेंडस्लाइड के बारे मैं सुना था लेकिन मुझे आगे रास्ते पर कुछ जगह पेड़ भी रास्ते पे गिरे हुये दिखे जो की पहाड़ो के ऊपर से गिर कर सड़क पे आ गए थे। कैंची धाम पहुँच कर के वहाँ पहाड़ी नींबू का शर्बत पिया और मंदिर मैं जा कर के थोड़ी देर मंदिर परिसर मैं बाबा के आसन के पास बैठा रहा, मैं जब वहाँ मंदिर

परिसर मैं बैठा हुआ था तो मन मैं शांति का एहसास हो रहा था और बिलकुल भी इच्छा नहीं हो रही थी की मैं वहाँ से जाऊँ, पहले सोचा था की मंदिर परिसर मैं सिर्फ 10 मिनट तक रहूँगा लेकिन मैं उससे काफी ज़्यादा समय तक वहीं रहा और नहीं जानता कितनी देर तक बस वहाँ बैठ कर के मैं उस शांति के एहसास को महसूस कर रहा था, लेकिन मुझे वहाँ से चलना ही था मेरे पास समय की कमी थी शायद कभी मैं वहाँ फिर जा कर के एक या दो दिनो तक का समय बिताऊँ।

अब आपको बता दू कैची धाम के बारे में अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति के सन्त बाबा नीम करौली अथवा नीब करौरी के चमत्कारों के संबंध में प्रचुर साहित्य उपलब्ध है न कि हिन्दी में, अपितु सात समन्दर पार उनके भक्तों ने दूसरी भाषाओं में बहुत कुछ लिखा है. गूगल पर सर्च करते ही वीडियो और इमेजेज से लेकर उनके चमत्कारों के किस्से कहानियों के प्रसंग पटे पड़े हैं. लेकिन मैं आपको जिन प्रसंगों से रूबरू कराने का प्रयास कर रहा हॅू, वे सुनी-सुनाई नहीं, बल्कि खुद आंखों देखी घटनाऐं हैं. जिन पर आज तक किसी ने प्रकाश नहीं डाला होगा.दरअसल जिस कैंची धाम से बाबा नीमकरौली को अन्तर्राष्ट्रीय क्षितिज पर पहचान मिली,

कैंची धाम मंदिर बिलकुल साफ था आपको कूड़े का एक दाना भी मंदिर परिसर मैं नज़र नहीं आएगा, मैं आपको मंदिर के अंदर की फोटो नहीं दिखा सकता क्यूंकी मंदिर परिसर के अंदर फोटो लेना माना हैं। बाबा को प्रणाम कर के मैं अपने सफर मे आगे चला और भवाली होते हुये नैनीताल पहुँच गया। नैनीताल जैसे की उम्मीद थी एक सुंदर जगह हैं पहाड़ो के बीच मे झील हैं जिसमे लोग नाव मे घूमने का आनंद ले सकते हैं लेकिन एक मशहूर पर्यटन स्थल होने की वजह से यहाँ पे भीड़ भी काफी थी और पहाड़ो पर तो होटल वालों ने कब्जा कर लिया था। सोचा की जब इतनी दूर आया हूँ तो थोड़ी देर झील मैं भी घूम लेता हूँ |

एक नाव को किराये पर लिया और झील मैं घूमने लगा नाव वाले से पूछा की यहाँ पे कभी बर्फ गिरती हैं तो उसने बताया की जनवरी और फरवरी मे बर्फ गिरती हैं फिर नाव मे घूमने के बाद समय देखा तो दोपहर के 2 बज रहे थे

Previous Post

हिमाचल प्रदेश में पहाड़ दरकने से बड़ा हादसा भूस्खलन के कारण चट्टान के नीचे गिरने से नौ लोगों की मौत

Next Post

बरसात के मौसम में घूमिये गढ़ पंचकोट पश्चिम बंगाल

डॉ. मधुसूदन नायर

डॉ. मधुसूदन नायर

Next Post
बरसात के मौसम में  घूमिये गढ़ पंचकोट पश्चिम बंगाल

बरसात के मौसम में घूमिये गढ़ पंचकोट पश्चिम बंगाल

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Browse by Category

  • feature
  • KOVID
  • public
  • Uncategorized
  • अंतराष्ट्रीय
  • आजमगढ़
  • उत्तरप्रदेश
  • उत्तरांचल
  • खान पान
  • खेल
  • जम्मू और कश्मीर
  • टेक्निक गुरु
  • दिल्ली
  • नारायणीयम आयुर्वेदिक स्कूल से
  • बंगाल
  • मनोरंजन
  • योजनाएं
  • राष्ट्रीय
  • लखनऊ
  • सम्पादकीय
  • सैर सपाटा
  • स्वास्थ्य
  • हिमांचल
  • About
  • Advertise
  • Privacy & Policy
  • Contact

© 2021 Rashtriya Patal .

No Result
View All Result
  • होम
  • अंतराष्ट्रीय
  • राष्ट्रीय
    • उत्तरप्रदेश
  • खेल
  • मनोरंजन
  • योजनाएं
  • सैर सपाटा
  • स्वास्थ्य

© 2021 Rashtriya Patal .