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मधुमेह के रोगियों के लिए – अपने भोजन पर नियंत्रण से ही ठीक करे – Rashtriya Patal
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मधुमेह के रोगियों के लिए – अपने भोजन पर नियंत्रण से ही ठीक करे

यदि आप या आपके घर पे कोई भी मधुमेह (डायबटिक) से पीड़ित है तो ये लेख आपके काम का है - नारायणीयम पंचकर्म चिकित्सालय

डॉ. मधुसूदन नायर by डॉ. मधुसूदन नायर
28/07/2021
in feature, नारायणीयम आयुर्वेदिक स्कूल से, स्वास्थ्य
0

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मधुमेह के रोगियों के लिए अपने भोजन पर नियंत्रण रखना अत्यंत आश्यक है। कई बार इन्सुलिन लेने वाले मधुमेह के रोगियों को जो भोजन तालिका चिकित्सा द्वारा बतायी जाती है उसमें चाय एवं काफी का भी उल्लेख होता है।

उन्हें सिर्फ क्रीम और शर्करा न लेने के लिए कहा जाता है। चाय और काफी का प्रयोग मधुमेह से ग्रस्त किसी भी व्यक्ति के लिए न करना ही श्रेयस्कर है, चाहे वह इन्सुलिन पर निर्भर हो अथवा नहीं। ये पदार्थ अच्छे स्वास्थ के निर्माण में सहायक नहीं होते हैं। ऐसे रोगियों को कई बार चिकित्सकों द्वारा डबलरोटी, अचार, अंडे आदि लेने की सलाह भी दी जाती है

पर हमें यह ध्यान रखना चाहिए की ये पदार्थ मधुमेह के रोगी के लिए आवश्यक खाद्य पदार्थों की श्रेणी में नहीं आते हैं।

मानव शरीर जिस शुगर को ऊर्जा उत्पन्न करने के लिए सबसे अधिक इस्तेमाल करता है वह ग्लूकोज है। आलू, चावल, दूध, रोटी सब पचकर खून में ग्लूकोज प्रदान करते हैं। भोजन में लिए गए खाद्य पदार्थ जठर तंत्र में पचाए जाते हैं और इसलिए खाने के फौरन बाद खून में ग्लूकोज का स्तर (शर्करा स्तर) बढ़ा हुआ मिलता है। सामान्य लोगों में यह स्तर कम बढ़ता है जबकि डायबीटीज के रोगियों में अधिक। इसी बात को आधार बनाकर भोजन के 2 घंटे बाद खून में शर्करा की जांच की जाती है। हम लोग जो दैनिक भोजन करते हैं उसमें कई अन्य प्रकार का शर्करा भी होता है। दूध में लैक्टोज होता है, फलों में फ्रक्टोज, रोटी व आलू में माल्टोज होता है।

यह सच है कि अगर आप फल खाते हैं तो खून में तुरंत ग्लूकोज का स्तर उतना नहीं बढ़ता जितना मिठाई खाने पर बढ़ता है। हालांकि शरीर के भीतर खाए गए फ्रक्टोज यानी फलों से मिलने वाले शर्करा को ग्लूकोज में बदलने की भी प्रणाली है। इसलिए फलों का अत्यधिक सेवन (विशेष रूप से मीठे फलों का) डायबीटीज रोगियों को नहीं करना चाहिए। फ्रक्टोज के कई अन्य नुकसान भी हैं। यह शरीर में ट्राइग्लिसराइड नामक वसा का स्तर व मोटापा बढ़ाता है और इंसुलिन के प्रति मानव ऊतकों की संवेदनशीलता कम करता है।

मधुमेह से ग्रस्त रोगियों को किसी भी वस्तु से अधिक ताजी, हरी सब्जियों की आवश्यकता होती है । प्रत्येक भोजन के साथ सलाद प्रचुर मात्रा में लिया जाना चाहिए । जब हम आधिक मात्रा में फल एवं सब्जियां लेते हैं तो शरीर में अधिक पानी पहूंचता है । यह गुर्दों एवं मूत्र उत्सर्जन तंत्र के लिए आवश्यक है । मधुमेह की स्थिति में हमें अपने गुर्दों एवं मूत्र उत्सर्जन तंत्र को अच्छी हालत में रखना चाहिए क्योंकी यह रोग गुर्दों पर एक प्रकार का तनाव डालता है ।

मधुमेह के रोगियों को अजवाइन, सोया, मेथी तथा गाजर की पत्ती का रस दिया जा सकता है । खट्टे फल, लौकी, खीरा, एवं काकड़ी अग्नाशय ग्रंथि को उन्नत करते हैं । प्याज एवं लहसून का रस उपयोगी है अत: इनका रस अन्य सब्जीयों के रस में मिलाना चाहिए ।

मधुमेह का एक रोगी कितनी मात्रा में स्टार्च एवं शर्करायुक्त चीजें ले सकता है-

ग्लूकोज के अक्सिकारण के लिए इन्सुलिन की आवश्यकता होती है। आक्सिकरण की यह प्रकीया शरीर के लिए ऊर्जा उत्पन्न करती है। जब इन्सुलिन की काफी मात्रा उत्पदित नहीं होती तो उसका परिणाम मधुमेह के रूप में सामने है इसलिए स्टार्च युक्त खाद्यपदार्थ अन्य साधारण लोगों की अपेक्षा मधुमेह से पीड़ित व्यक्तियों के आहार का अधिक आवश्यक होते हैं।

शहद एवं कई फल जैसे अंजीर आदि तथा कुछ सब्जियाँ जैसे गाजर एवं चुकन्दर आदि में फ्रक्टोज शर्करा होती है जिसे फल शर्करा का नाम से भी जाना जाता है। फ्रक्टोज शर्करा मधुमेह से ग्रस्त लोगों के लिए विशेष रूप से उपयोगी होती है ।

मधुमेह से ग्रस्त रोगी के बारे में हमें यह जानने का प्रयास करना चाहिए कि शर्करा एवं स्टार्च की मात्रा किस स्तर तक शरीर ग्रहण कर सकता है । कभी-कभी स्टार्च की मात्रा किस स्तर तक शरीर ग्रहण कर सकता है। कभी – कभी स्टार्च की मात्रा एकदम से घटा दी जाती है और बहुत सारे मीठे खाद्य पदार्थ, मिठाई एवं स्टार्च जो एक सामान्य आदमी खाता है, एक साथ कम किए जा सकता हैं ।

यह मधुमेह की तीव्रता और ग्रहण किए जाने वाली इन्सुलिन की मात्रा पर निर्भर करता है की स्टार्च युक्त खाद्य पदार्थों की कितनी मात्रा ली जा सकती है। हम इसे रक्त शर्करा एवं मूत्र परीक्षणों से नियंत्रण कर सकते हैं।

ग्लाइसिमिक इंडेक्स,ग्लाइसिमिक लोड और ग्लाइमिक रेस्पोंस

मधुमेह के आहार के बारे में चर्चा करते समय ग्लाइसिमिक इंडेक्स ग्लाइसिमिक लोड और ग्लाइमिक रेस्पोंस का जिक्र आता है । ये क्या हैं ?

ये मधुमेह से संबंधित सूचायाकंक हैं  जिनका प्रयोग चिकित्सकों द्वारा किया जाता है। ग्लाहसिमिक इंडेक्स है जो खाद्य पदार्थों में मौजूद कार्बोहाइड्रेट के ग्लूकोज में बदलने के आधार पर उन खाद्य पदार्थों को 0-100 के बीच स्थान देता है।

एक अनुसंधान के अनुसार हर खाने में मौजूद शर्करा के कारण रक्त में शर्करा का स्तर नहीं बढ़ता है। ग्लाइसिमिक लोड ( जी. एल.): जी. आई. और खाने की कुल मात्रा मिलकर जी. एल. का पता लगाया जाता है।

जी. एल. रक्त शर्करा में बढ़ोत्तरी मात्रा को निर्धारित करता है।ग्लाइसिमिक रिस्पोंस ( जी.आर.) यह एक महत्वपूर्ण सूचकांक है। यह शरीर की वह रफ्तार है जिससे एह खाद्य पदार्थ के ग्लूकोज को रक्त शर्करा में बदलता है।

दैनिक आहार का नमूना चार्ट

मधुमेह के एक रोगी को दिए जाने वाले दैनिक आहार का नमूना चार्ट बना सकते हैं
मधुमेह के प्रत्येक रोगी को दिया जाने वाला आहार उस रोगी की व्यक्तिगत आवश्यकताओं एवं जीवनशैली के हिसाब से निश्चित किया जाना चाहिए
आहार चार्ट बनाते समय रोगी की आयु, उसका वजन उसके कार्य की प्रकृति, दिनचर्या तथा आवश्यक कैलोरियों की मात्रा आदि को ध्यान में रखा जाना चाहिए । लगभग 1500 कैलोरी उपलब्ध कराने वाले आहार की नमूना तालिका इस प्रकार बनाया जा सकता है :-

प्रात: काल- एक गिलास गूनगूने पानी में आधा निम्बू निचोड़ कर लें या मेथी आथवा आंवले का पानी लें ।

नाश्ता (8 बजे ) – एक कटोरी दही या अंकुरित मूंग एवं मेथी या एक गिलास छाछ ।

भोजन (11 से 12 बजे) – गेहूं, जौ, चना एवं मेथी को मिला कर उस आटे की रोटियाँ2, उबली हुई सब्जी, सलाद, अंकुरित मूंग की दाल या एक कटोरी दही, आंवले की चटनी ।

सांयकाल (4 बजे) – (प्रात: काल की तरह) – सब्जी का सूप या भुने हुए चने या नींबू एवं पानी

भोजन (7 बजे) – रोटी. सब्जी एवं सलाद (दोपहर की तरह) यह एक नमूना चार्ट है । रोगी के रक्त में शर्करा की स्थिति को देखते हुए तथा चिकित्सक के निर्देशानुसार इसमें आवश्यक परिवर्तन किये जा सकते है ।

मधुमेह के रोगी के आहार में ‘फाइबर’ के क्या उपयोगिता है ?

फाइबर का अर्थ है – मोटे रेशेदार पदार्थ । मधुमेह के रोगी के आहार में ‘फाइबर’ की मात्रा अधिक होनी चाहिए । ये भोजन के बाद रक्त में शर्करा के स्तर को बढ़ने नहीं देते । ये कब्ज को दूर करते हैं तथा रक्त में ट्राईग्लिसराइड्स  तथा कोलेस्ट्रोल के स्तर को भी कम करते हैं । ये वजन कम करने में भी सहायता पहुंचाते हैं । हरी पत्ती वाली सब्जियाँ, मेथी तथा चोकर आदि से फाइबर की पूर्ति की जा सकती है । आधुनिक अध्ययनों ने भी इस बात को प्रादर्शित किया है ।

चोकर का नियमित प्रयोग मधुमेह के अलावा हृदय रोगियों के लिए भी लाभदायक है । “हिन्दुस्तान” समाचार पत्र में प्रकाशित एक शोध रिपोर्ट के अनुसार “मात्र 10 ग्राम चोकर आप के दिल की रक्षा कर सकता है । अगर आप अपने खाने में रोजाना 10 ग्राम फाइबर जैसे – चोकर आदि को और बढ़ा दें तो दिल की बीमारी की संभावना 27 प्रतिशत कम जो जाती है ।” यह शोध किया है अमेरिका डाक्टर मैकयोन ने ।

इस शोध के अनुसार हर व्यक्ति को कम से कम रोजाना 37 ग्राम फाइबर जरूर अपने भोजन में शामिल करना चाहिए। वैसे आम आदमी के भोजन में 15 से 20 ग्राम फाइबर शामिल रहता है। इसे 10 ग्राम और बढ़ा दें तो दिल की बीमारी से बचा जा सकता है । डॉ. मैकयोन ने अपने शोध में पाया है की ऐसी चीजें जिनसे स्टार्च बनता है, कम खानी चाहिए या एकदम ही नहीं खानी चाहिए, क्योंकी इनकी भूमिका मानव शरीर में चीनी की तरह होती है। स्टार्च युक्त चीजें रक्त में पहुँच कर धीरे-धीरे चीनी बनाती हैं । अत: आलू, शकरकंद आदि कम खानी चाहिए। अगर आप आलू खाना ही चाहते हैं तो आप मटर आलू कभी न खाएँ, क्योंकी ये स्टार्च पैदा करेंगे । आलू खाना हो तो आलू मेथी, आलू पालक आदि खाये जा सकते हैं। स्टार्च मानव शरीर में प्रवेश करके पहले मेटबालिक सिंड्रोम पैदा कराता है जो दिल को सेहत मंद रखने के लिए जरूरी है की आप रोजाना तीन फल खाएँ। उनका कहना है कि फल जूस से बेहतर होते हैं, क्योंकी इनमें रेशे होते हैं। फल सलाद से बेहतर हैं ये तीनों फल रंग बिरंगे और अलग-अलग होने चाहिए । यह नहीं की आप तीन सेब खा लें या तीन केले। ये तीनों फल अलग-अलग हों। एक सेब में 3 ग्राम, आड़ू में 5 ग्राम, केले,में 3 ग्राम फाइबर होता है । 10 ग्राम चोकर तथा ये तीन रंगबिरंगे फल आप को दिल की बीमारी से मुक्त रखने में समर्थ हैं।

इस शोध पर आगे कहा गया है की जब भी आप कुछ खाने का सामन खरीदें तो देखें की उस पर ‘होल’ लिखा है या नहीं जिसका अर्थ है की यह फाइबर युक्त है । जैसे डबलरोटी या आटा उस पर ‘होल’ लिखा होना चाहिए । जिस पर ‘एनरिच’ लिखा हूआ हो उसका अर्थ है की वह स्टार्च युक्त है और उसे खाने से परहेज करना चाहिए । कई खाद्यान्नों के ऊपर लिखा रहता है ‘एनरिच’ जो की दिल के लिए सुरक्षित नहीं माना जाता है । शोध में आगे  कहा गया है की चीनी की अपेक्षा गुड़ ज्यादा अच्छा है । ब्राउन आटा सफेद आटे की तुलना में ज्यादा अच्छा है । डॉ. मैकायोन ने लोगों को मैदा कल्चर से बचने की सलाह दी है ।

उपर्युक्त स्पष्टीकरण से स्पष्ट है कि फाइबर के रूप में चोकर का प्रयोग न केवल मधुमेह के रोगियों के लिए बल्कि अन्य सभी के लिए भी अत्यंत लाभदायक है

मधुमेह और मेथी

मेथी मधुमेह को नियंत्रित करती है।

नवीन अनुसंधानों ने मधुमेह के नियंत्रण में मेथी की भूमिका को महत्वपूर्ण  बताया है । प्राचीन समय से ही हमारे रसोईघरों में मेथी का प्रयोग कई रूपों में होता रहा हैं । मेथी के बीजों में काफी मात्रा में फाइबर होता है । इसमें ट्राईगोनेलीन नामक एक एल्केलाएंड भी पाया गया है । जिसका कार्य रक्त में शर्करा के स्तर को कम करना है । मेथी का प्रयोग मधुमेह के दोनों वर्गो, इंसुलिन पर निर्भर एवं इंसुलिन पर अनिर्भर में किया जा सकता है । यह रक्त में कोलेस्ट्रोल एवं ट्राईग्लिसराईडस के स्तर को भी कम करने में मदद करती है ।

मधुमेह नियंत्रण में मेथी के महत्व को देखते हुए प्राय: सभी प्राकृतिक चिकित्सालयों एवं योग केन्द्रों में मधुमेह के रोगियों के आहार में मेथी का प्रयोग अंकुरित के रूप में तथा मेथी पानी के रूप में काफी लम्बे समय से किया जाता रहा है ।

दाना मेथी में क्या- क्या चीजें पायी जाती हैं ?

मधुमेह दे रोगियों के लिए गुणकारी दाना मेथी की 100 ग्राम मात्रा का खाद्य मूल्य निम्नलिखित है

मधुमेह के रोगी को दाना मेथी का सेवन किस प्रकार से करना चाहिए ?

मधुमेह के रोगी दाना मेथी को कई प्रकार का सेवन किस प्रकार से करना चाहिए ?

  1. दाना मेथी को उबालकर उसका क्वाथ बनाकर
  2. दाना मेथी को भिगोकर उसका पानी पीकर
  3. दाना मेथी को अंकुरित करके
  4. दाना मेथी को पीसकर उसका पाउडर बनाकरमधुमेह के रोगियों को जामुन, करेला, नीम तथा बेलपत्र आदि के प्रयोग की सलाह भी दी जाती है । ये मधुमेह के नियंत्रण में मदद करती हैं।

    ऐसा माना जाता है की एय चीजें रक्त में शर्करा के स्तर को कम करने में मदद करती हैं ।  इसलिए प्राय: मधुमेह के रोगियों द्वारा इनका प्रयोग किया जाता है । कागजी नींबू का रस ताजे पानी में निचोड़कर दिन में एक दो बार पीना चाहिए । ताजे आंवले का रस रोज लेना इस रोग इस रोग में अत्यंत लाभकारी पाया गया है । जामुन का थोड़ा-थोड़ा रस दिन में चार बार पीना भी इस रोग में हितकारी माना जाता है । ताजे बेल पत्रों को पीसकर उनका 10 मिली रस या करेले का आधा कप रस प्रात: उठने पर लेना चाहिए । रक्त में शर्करा के स्तर को ध्यान में रखते हुए तथा चिकित्सा के निर्देशानूसर इन सभी का प्रयोग आवश्यक्तानूसार किया जा सकता है ।

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