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तिलक का महत्व…

दिमाग में सेराटोनिन और बीटा एंडोर्फिन का स्राव संतुलित तरीके से होता है, जिससे उदासी दूर होती है और मन में उत्साह जागता है

डॉ. मधुसूदन नायर by डॉ. मधुसूदन नायर
28/09/2021
in feature, नारायणीयम आयुर्वेदिक स्कूल से
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तिलक का महत्व…
तिलक का महत्व,,
हिन्दू परिवारों में किसी भी शुभ कार्य में माथे पर तिलक का टीका लगाने का विधान है। … पुराणों में यह वर्णन मिलता है कि संगम तट पर स्नान के बाद तिलक लगाने से मोक्ष की प्राप्ति होती है यही कारण है कि स्नान के बाद पंडो द्वारा विशेष तिलक अपने भक्तों को लगाया जाता है। माथे पे तिलक लगाने के पीछे अध्यात्मिक महत्व है।
इस स्थान को त्रिवेणी या संगम भी कहा जाता है क्योंकि यहां पर शरीर की तीन नाड़ियां एक साथ मिलती हैं. यही स्थान मन का गुरू का भी होता है, इसलिए इसे काफी महत्वपूर्ण माना जाता है. इस स्थान पर तिलक लगाने से मन की एकाग्रता बढ़ती है
हिन्दु परम्परा में मस्तक पर तिलक लगाना शुभ माना जाता है इसे सात्विकता का प्रतीक माना जाता है विजयश्री प्राप्त करने के उद्देश्य से रोली, हल्दी, चन्दन या फिर कुमकुम तिलक या कार्य की महत्ता को ध्यान में रखकर, इसी प्रकार शुभकामनाओं के रुप में हमारे तीर्थस्थानों पर, विभिन्न पर्वो-त्यौहारों, विशेष अतिथि आगमन पर आवाजाही के उद्देश्य से भी लगाया जाता है ।
मस्तिष्क के भ्रु-मध्य ललाट में जिस स्थान पर टीका या तिलक लगाया जाता है यह भाग आज्ञाचक्र है । शरीर शास्त्र के अनुसार पीनियल ग्रन्थि का स्थान होने की वजह से, जब पीनियल ग्रन्थि को उद्दीप्त किया जाता हैं, तो मस्तष्क के अन्दर एक तरह के प्रकाश की अनुभूति होती है ।
इसे प्रयोगों द्वारा प्रमाणित किया जा चुका है हमारे ऋषिगण इस बात को भलीभाँति जानते थे पीनियल ग्रन्थि के उद्दीपन से आज्ञाचक्र का उद्दीपन होगा । इसी वजह से धार्मिक कर्मकाण्ड, पूजा-उपासना व शूभकार्यो में टीका लगाने का प्रचलन से बार-बार उस के उद्दीपन से हमारे शरीर में स्थूल-सूक्ष्म अवयन जागृत हो सकें ।
इस आसान तरीके से सर्वसाधारण की रुचि धार्मिकता की ओर, आत्मिकता की ओर, तृतीय नेत्र जानकर इसके उन्मीलन की दिशा में किया गयच प्रयास जिससे आज्ञाचक्र को नियमित उत्तेजना मिलती रहती है
इस विषय पर एक बात मैविशेष रूप से कहूंगा कि तिलक मे कभी भी काले रंग का प्रयोग नहीं किया जाता है क्यूकी काला रंग सबसे अधिक नकारात्मक शक्तियों को ग्रहण करने कि शक्ति रखता है इसलिए ,,,,,
मगर आजकल स्त्रीयों मे तो काली बिंदी का प्रयोग बहुत बढ़ गया है फेशन के कारण जो कि उचित नहीं है .
                                       राशि के हिसाब से कौन सा तिलक लगाना चाहिए.
  • मेष : इस राशि वालों को हमेशा लाल कुमकुम या रोली का तिलक लगाना चाहिए क्योंकि मेष का स्वामी मंगल होता है. मंगल का रंग लाल माना गया है.

    वृष : ये शुक्र के स्वामित्व वाली राशि है. ऐसे लोगों को मस्तक पर सफेद चंदन लगाना चाहिए. अगर सफेद चंदन न हो तो दही से मस्तक पर तिलक लगा सकते हैं.

    मिथुन : मिथुन राशि वालों के लिए अष्टगंध का तिलक लगाना बहुत शुभ माना गया है. अष्टगंध आठ गंधद्रव्यों का संग्रह होता है. ये दो तरह का होता है शैव और वैष्णव. गृहस्थ लोगों को शैव अष्टगंध का प्रयोग करना चाहिए.

    कर्क : इस राशि का स्वामी चंद्रमा है. चंद्रमा का रंग सफेद होता है. ऐसे लोगों को सफेद रंग का चंदन मस्तक पर लगाना चाहिए.

    सिंह : सिंह राशि वालों का स्वामी सूर्य है. ऐसे लोगां को लाल रंग के कुमकुम या रोली का तिलक लगाना चाहिए.

    कन्या : इस राशि का स्वामी भी बुध है. ऐसे लोगों को भी अष्टगंध का तिलक लगाने से काफी लाभ होता है.

    तुला : शुक्र ग्रह तुला राशि का स्वामी होता है. इस राशि के जातक भी सफेद चंदन या दही का तिलक लगाएं.

    वृश्चिक : मंगल ग्रह के स्वामित्व वाली इस राशि के जातकों को लाल रंग का तिलक मस्तक पर लगाना चाहिए.

    धनु : धनु राशि के स्वामी गुरू बृहस्पति हैं. ऐसे लोगों को पीला चंदन या हल्दी को मस्तक पर लगाना चाहिए.

    मकर : मकर राशि के स्वामी शनिदेव हैं. इन लोगों को काली भस्म या काला काजल मस्तक पर लगाना चाहिए.

    कुंभ : इस राशि के लोगों को भी काली भस्म या काजल ही माथे पर लगाना चाहिए क्योंकि कुंभ राशि के स्वामी भी शनिदेव हैं.

    मीन : ये राशि बृहस्पति के स्वामित्व वाली राशि है. ऐसे लोगों को पीला चंदन, केसर या हल्दी का तिलक लगाना चाहिए.

     

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