Notice: Function _load_textdomain_just_in_time was called incorrectly. Translation loading for the jnews domain was triggered too early. This is usually an indicator for some code in the plugin or theme running too early. Translations should be loaded at the init action or later. Please see Debugging in WordPress for more information. (This message was added in version 6.7.0.) in /home/u148675077/domains/rashtriyapatal.com/public_html/wp-includes/functions.php on line 6114
कानपुर पुलिस कमिश्नर असीम अरुण अब बीजेपी से चुनाव लड़कर बनेंगें जनसेवक… – Rashtriya Patal
  • About
  • Advertise
  • Privacy & Policy
  • Contact
Social icon element need JNews Essential plugin to be activated.
Rashtriya Patal
Advertisement
  • होम
  • अंतराष्ट्रीय
  • राष्ट्रीय
    • उत्तरप्रदेश
  • खेल
  • मनोरंजन
  • योजनाएं
  • सैर सपाटा
  • स्वास्थ्य
No Result
View All Result
  • होम
  • अंतराष्ट्रीय
  • राष्ट्रीय
    • उत्तरप्रदेश
  • खेल
  • मनोरंजन
  • योजनाएं
  • सैर सपाटा
  • स्वास्थ्य
No Result
View All Result
Rashtriya Patal
No Result
View All Result

कानपुर पुलिस कमिश्नर असीम अरुण अब बीजेपी से चुनाव लड़कर बनेंगें जनसेवक…

कन्नौज सदर से चुनाव लड़ेंगे कमिश्नर,आईपीएस अफसर असीम अरुण

admin by admin
09/01/2022
in feature, उत्तरप्रदेश
0
कानपुर पुलिस कमिश्नर असीम अरुण अब बीजेपी से चुनाव लड़कर बनेंगें जनसेवक…

कानपुर :-  पुलिस कमिश्नर असीम अरुण ने वी आर एस (एच्छिक सेवा निवृत्ति) के लिए आवेदन किया है. उन्होंने एक बयान में कहा है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उन्हें भाजपा में शामिल होने का प्रस्ताव दिया है. उन्होंंने इसकी घोषणा उस दिन की जब यूपी सहित 5 राज्यों में चुनाव की तारीखों का ऐलान चुनाव आयोग ने किया. असीम अरुण के कन्नौज सदर से चुनाव लड़ने की खबर है।

कौन हैं असीम अरुण?
यूपी के बदायूं जिले में पैदा हुए. उनके पिता भी IPS थे. वो उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक भी रहे. उनकी माता शशि‍ अरुण जानी-मानी लेखि‍का और समाजसेवि‍का रहीं. असीम अरुण की शुरुआती पढ़ाई लखनऊ के सेंट फ्रांसि‍स स्‍कूल से हुई. इसके बाद दिल्ली के सेंट स्‍टीफेंस कॉलेज से उन्होंने बीएससी की.

असीम अरुण 1994 बैच के IPS अधिकारी हैं. भारतीय पुलि‍स सेवा में आने के बाद वह यूपी के कई जिलों में तैनात रहे. टिहरी गढ़वाल (अब उत्तराखंड) से लेकर बलरामपुर, हाथरस, सिद्धार्थ नगर, अलीगढ़, गोरखपुर और आगरा में बतौर पुलिस अधीक्षक एवं पुलिस उपमहानिरीक्षक अपनी सेवाएं दी.

इसके बाद कुछ समय के लिए स्टडी लीव पर विदेश चले गए. वापस आने के बाद एटीएस लखनऊ में कार्यभार संभाला. वह वाराणसी जोन के आईजी रह चुके हैं. इसके बाद IG एटीएस बनाए गए.

SPG में भी रहे
असीम अरुण तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की सिक्युरिटी में शामिल रहे हैं. एसपीजी में क्‍लोज़ प्रोटेक्‍शन टीम (CPT) का नेतृत्व कर चुके हैं. उनके शानदार प्रदर्शन को देखते हुए ही उन्हें एनएसजी मानेसर सहि‍त सीबीआई की साइबर अपराध वि‍वेचना अकादमी गाजि‍याबाद में भी सेवाएं देने का मौका मिला. पुलिस की डायल 100 सेवा शुरू किए जाने में भी उनका अहम योगदान रहा है.

साल 2009 में उन्होंने अलीगढ़ जनपद में तैनाती के वक्त भारत की पहली जनपद स्तरीय स्पेशल वेपन्स एंड टेक्टिक्स टीम यानी स्वॉट का गठन किया. स्वॉट टीम आतंकी और जोखि‍मपूर्ण मिशन को अंजाम देने वाली खास हथियारों से लैस विशेष कमांडो टीम है. आगरा में डीआईजी के पद पर रहते हुए असीम अरुण ने इस टीम को विस्तार भी दिया और वहां भी स्वॉट टीम का गठन किया.

2002 में असीम अरुण को संयुक्‍त राष्‍ट्र संघ ने कोसोवो में एक साल के लिए तैनात किया. जहां उन्होंने सराहनीय सेवाएं दी. संयुक्त राष्ट्र और एसपीजी में तैनाती के वक्त और अवकाश के दौरान वे देश के सभी राज्यों और 20 से ज्यादा देशों की यात्रा कर चुके हैं.

सैफुल्ला के एनकाउंटर के बाद चर्चा में आए
असीम अरुण ने ISIS से जुड़े आतंकवादी सैफुल्ला के एनकाउंटर का ऑपरेशन लीड किया था. सैफुल्ला कानपुर का रहने वाला था. असीम अरुण को जानकारी मिली थी कि वो लखनऊ के ठाकुरगंज में छिपा हुआ है. यह पूरा घटनाक्रम पिछले यूपी विधानसभा चुनाव के बिल्कुल आखिर में 8 मार्च, 2017 हुआ था.

22 साल के सैफुल्ला के एनकाउंटर का ऑपरेशन लगभग 12 घंटे तक चला था. असीम अरुण के नेतृत्व में कमांडो ने सैफुल्ला से सरेंडर करने को कहा. लेकिन सैफुल्ला ने सरेंडर नहीं किया और सुरक्षा टीम पर गोलीबारी जारी रखी. जवाबी कार्रवाई में उसे मार दिया गया. एनकाउंटर के बाद सैफुल्ला के शव के पास से ISIS का झंडा मिला था. इसके साथ ही उसके पास से पासपोर्ट, वायर और पिस्टल भी मिली थीं.

इस एनकाउंटर के बाद सैफुल्ला के पिता सरताज ने उसका शव लेने से इनकार कर दिया था. सैफुल्ला उनका सबसे छोटा बेटा था.सरताज ने यह कहते हुए सैफुल्ला का शव लेने से मना कर दिया कि एक गद्दार से उनका कोई संबंध नहीं, बेटा होना तो दूर की बात है. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा था कि सैफुल्ला के व्यवहार से कभी लगा नहीं कि वो आतंकवादी हो सकता है।

Previous Post

सावधान आजमगढ़ में भी कोविड के तीसरी लहर की दस्तक

Next Post

‘लोकतंत्र के महापर्व में प्रदेश के चुनाव की तिथियों की घोषणा

admin

admin

Next Post
‘लोकतंत्र के महापर्व में प्रदेश के चुनाव की तिथियों की घोषणा

'लोकतंत्र के महापर्व में प्रदेश के चुनाव की तिथियों की घोषणा

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Browse by Category

  • feature
  • KOVID
  • public
  • Uncategorized
  • अंतराष्ट्रीय
  • आजमगढ़
  • उत्तरप्रदेश
  • उत्तरांचल
  • खान पान
  • खेल
  • जम्मू और कश्मीर
  • टेक्निक गुरु
  • दिल्ली
  • नारायणीयम आयुर्वेदिक स्कूल से
  • बंगाल
  • मनोरंजन
  • योजनाएं
  • राष्ट्रीय
  • लखनऊ
  • सम्पादकीय
  • सैर सपाटा
  • स्वास्थ्य
  • हिमांचल
  • About
  • Advertise
  • Privacy & Policy
  • Contact

© 2021 Rashtriya Patal .

No Result
View All Result
  • होम
  • अंतराष्ट्रीय
  • राष्ट्रीय
    • उत्तरप्रदेश
  • खेल
  • मनोरंजन
  • योजनाएं
  • सैर सपाटा
  • स्वास्थ्य

© 2021 Rashtriya Patal .