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मानव जनित तबाही से जूंझ रहा जोशीमठ – Rashtriya Patal
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मानव जनित तबाही से जूंझ रहा जोशीमठ

admin by admin
15/01/2023
in feature, उत्तरांचल
0
मानव जनित तबाही से जूंझ रहा जोशीमठ

news

जोशी मठ ➖ बताते चले की पांडुकेश्वर में पाये गये कत्यूरी राजा ललितशूर के तांब्रपत्र के अनुसार जोशीमठ कत्यूरी राजाओं की राजधानी थी, जिसका उस समय का नाम कार्तिकेयपुर था। लगता है कि एक क्षत्रिय सेनापति कंटुरा वासुदेव ने गढ़वाल की उत्तरी सीमा पर अपना शासन स्थापित किया तथा जोशीमठ में अपनी राजधानी बसायी।

फिर भी हिंदुओं के लिये एक धार्मिक स्थल की प्रधानता के रूप में जोशीमठ, आदि शंकराचार्य की संबद्धता के कारण मान्य हुआ। जोशीमठ शब्द ज्योतिर्मठ शब्द का अपभ्रंश रूप है जिसे कभी-कभी ज्योतिषपीठ भी कहते हैं। इसे वर्तमान 8वीं सदी में आदि शंकराचार्य ने स्थापित किया था। उन्होंने यहां एक शहतूत के पेड़ के नीचे तप किया और यहीं उन्हें ज्योति या ज्ञान की प्राप्ति हुई। यहीं उन्होंने शंकर भाष्य की रचना की जो सनातन धर्म के सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण ग्रंथों में से एक है।

शंकराचार्य के जीवन के धार्मिक वर्णन के अनुसार भी ज्ञात होता है कि उन्होंने इसके पास ही अपने चार विद्यापीठों में से एक की स्थापना की और इसे ज्योतिर्मठ का नाम दिया, जहां उन्होंने अपने शिष्य टोटका को यह गद्दी सौंप दी। ज्योतिर्मठवह ज्योतिर्मठ के पहले शंकराचार्य बने।

बद्रीनाथ पथ पर एक महत्त्वपूर्ण धार्मिक केंद्र होने के अलावा जोशीमठ एक व्यापार केंद्र भी था। नीति एवं माना के भोटिया लोग अपना माल बिक्री के लिये यहां लाते थे।

ई.टी. एटकिस के अनुसार (दी हिमालयन गजेटियर, वोल्युम III, भाग I। वर्ष 1882 में जोशीमठ माना एवं नीति की सड़कों पर एक महत्त्वपूर्ण स्थान है जहां रमनी से खुलारा पास का रास्ता यहां आता है। वहां मंदिर का एक अतिथिगृह, लोक निर्माण विभाग का एक निरीक्षण बंगला, एक तीर्थयात्री का अस्पताल तथा एक पुलिस थाना भी है जो सीजन में ही कार्यरत होता है

पिछले कुछ दिनों में जोशीमठ का नाम एकदम से खबरों में छा गया है। जिसके पीछे का कारण है जोशीमठ में आई भयंकर दरार। अब हालिया अपडेट ये है कि प्रशासन ने आपदा से निपटने की तैयारियां शुरू कर दी हैं जिसके तहत सबसे पहला कदम उठाते हुए बुलडोजर चलाने की प्रक्रिया आरंभ हो चुकी है।

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