• About
  • Advertise
  • Privacy & Policy
  • Contact
Rashtriya Patal
Advertisement
  • होम
  • अंतराष्ट्रीय
  • राष्ट्रीय
    • उत्तरप्रदेश
  • खेल
  • मनोरंजन
  • योजनाएं
  • सैर सपाटा
  • स्वास्थ्य
No Result
View All Result
  • होम
  • अंतराष्ट्रीय
  • राष्ट्रीय
    • उत्तरप्रदेश
  • खेल
  • मनोरंजन
  • योजनाएं
  • सैर सपाटा
  • स्वास्थ्य
No Result
View All Result
Rashtriya Patal
No Result
View All Result
Home feature

वो पांच दिन ….

जो मैने पांडुखोली में बिताए

admin by admin
13/04/2026
in feature, Uncategorized, उत्तरांचल
0 0
0
0
SHARES
4
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter
+1
0
अल्मोड़ा में आज तीसरा दिन है लगातार तीन दिनों तक कसार देवी पर प्रतिदिन ध्यान का सिलसिला जारी था वही मेरी मुलाकात पैसोरी से हुई वैसे 38वर्षीय कनाडा मूल की है पर देखने से कोई 25 से ज्यादा नहीं कह सकता योग तो मानो इसके रोम रोम बसा हो काफी बढ़िया आयुर्वेद की जानकारी है इसको आते जाते रस्ते में मिलने वाले सभी पेड़ पौधे का पूरा बॉटनिकल नाम सहित मेडिकल यूजेस की पूरी जानकारी थी
उसको उसी ने बताया कि कल चलो पांडुकोली चलते है इसलिए रात में वो मेरे ही होने स्टे में रुक गई रात भर हम लोगों ने खूब बाते की बात करते जाते कब रात के ३ बज गए पता ही नहीं चल चुकी अल सुबह ही निकलना था सो हमलोग सो गए
सुबह के ५ बजे उसने मुझे जगाया और तैयार होने को कहा होने स्टे वाले की स्कूटी लेकर हम चल दिए ये पता था कि स्कूटी से पूरी यात्रा नहीं हो सकती आगे की यात्रा पैदल की करनी होगी
अल सुबह की ठंडी हवा में जब उसने मुझे जगाया, तो नींद और उत्साह दोनों आँखों में एक साथ बैठे थे जैसे कोई बच्चा पिकनिक पर जा रहा हो, और मन भीतर से कह रहा हो ये सफर साधारण नहीं होगा
हमने जल्दी-जल्दी तैयार होकर होमस्टे वाले की स्कूटी उठाई और निकल पड़े। रास्ता पहाड़ों का था संकरी सड़कें, एक तरफ गहरी खाई, दूसरी तरफ देवदार और बुरांश के पेड़…  और बीच में हम दो लोग, जैसे किसी फिल्म के सीन में बिना कैमरे के घुस आए हों।
रास्ते भर पैसोरी का ज्ञान चालू था ये देखो Rhododendron arboreum… बुरांश… heart के लिए अच्छा
ये Cedrus deodara… देवदार… anti-inflammatory…
मैं बस “हूँ… अच्छा…करता जा रहा था, और मन ही मन सोच रहा था  हे भगवान, ये लड़की है या चलता-फिरता आयुर्वेदिक encyclopedia , कुछ दूर जाकर सड़क ने हाथ जोड़ दिए भाई, अब आगे मेरी ड्यूटी खत्म, तुम पैदल जाओ हमने स्कूटी एक सुरक्षित किनारे लगाई और असली यात्रा शुरू हुई।  जंगल का रास्ता था शांत, गहरा, और थोड़ा रहस्यमयी।
हर कदम पर सूखे पत्तों की आवाज़, जैसे कोई पुरानी कहानी फुसफुसा रही हो  पैसोरी कभी किसी पत्ते को छूती, कभी किसी जड़ी को पहचानती और मैं? मैं बस अपनी साँसें पहचानने की कोशिश कर रहा था  चढ़ाई धीरे-धीरे कठिन होती गई ,एक जगह मैं बैठ गया और बोला थोड़ा ध्यान यहीं कर लेते हैं… वो हँस पड़ी
ये ध्यान नहीं, थकान है डॉक्टर!
जब हम पांडुखोली पहुँचे, तो पहली अनुभूति शब्दों से बाहर थी। गुफाएँ शांत थीं इतनी शांत कि अपने ही विचार भारी लगने लगें।
वहाँ बैठकर जब हमने ध्यान किया, तो लगा जैसे समय ठहर गया हो न कोई जल्दी, न कोई शोर… बस श्वास और अस्तित्व।
वो बोली शायद पांडव यहाँ इसलिए रुके होंगे… क्योंकि यहाँ खुद से मिलना आसान है लगता है पांडव पूरे हिमायल में बहुत घूमे थे पर उसकी बात में गहराई थी… और उस जगह में भी। शाम को जब हम बाहर निकले, तो सामने जो दृश्य था…
वो किसी पोस्टकार्ड से नहीं, सीधे ईश्वर की imagination से निकला हुआ लग रहा था। दूर-दूर तक हिमालय की बर्फीली चोटियाँ
सामने खुला हिमालय एक जीवंत सभा जैसे ही बादलों की परत थोड़ी हटी, सामने एक-एक करके चोटियाँ उभरने लगीं…
त्रिशूल सबसे पहले जो ध्यान खींचती है, वो है त्रिशूल। तीन नुकीले शिखर बिल्कुल वैसे जैसे भगवान शिव का त्रिशूल आकाश में गड़ा हो।
उसकी आकृति में एक अजीब सा तेज है न बहुत आक्रामक, न बहुत शांत… बल्कि एक संतुलित शक्ति।
सूरज की किरणें जब उस पर पड़ती हैं, तो ऐसा लगता है जैसे त्रिशूल सच में प्रकाश छोड़ रहा हो
अगला था
Nanda Devi
थोड़ा बाएँ नजर घुमाओ, तो एक गरिमामयी, राजसी चोटी दिखाई देती है नंदा देवी ये चोटी दिखती नहीं… महसूस होती है।
इसके चारों तरफ की चोटियाँ जैसे इसकी रक्षा कर रही हों
उसकी ऊँचाई में एक मातृत्व है जैसे कोई देवी अपने आंचल में सबको समेटे हुए हो
पैसोरी ने धीरे से कहा   “ये सिर्फ mountain नहीं है… ये emotion है।”  अब अगला था
Nanda Kot
नंदा देवी के पास ही, थोड़ा अलग थलग…  नंदा कोट खड़ी है।   इसमें एक अलग ही व्यक्तित्व है थोड़ा कठोर, थोड़ा गंभीर…
जैसे कोई प्रहरी, जो चुपचाप अपनी ड्यूटी निभा रहा हो  उसकी धारियाँ और बर्फ की लकीरें ऐसी लगती हैं जैसे समय ने खुद उस पर अपनी उँगलियों के निशान छोड़ दिए हों।
अगली थी पंचाचूली पीक्स जिसको मैंने कई स्थाई से देखा था दूर दाईं ओर…  पाँच चोटियाँ एक साथ खड़ी दिखाई देती हैं पंचचूली
ऐसा लगता है जैसे पाँच भाई एक साथ खड़े हों हर एक अलग, पर एक ही परिवार का हिस्सा।
कहते हैं ये पांडवों की रसोई थी और सच में, उनमें एक घरेलू सा अपनापन दिखता है। शाम के समय जब सूरज ढलता है,
तो इन पाँचों चोटियों पर हल्का सुनहरा रंग चढ़ जाता है जैसे किसी ने तवे पर रोटी सेकते समय हल्का सा घी लगा दिया हो
फ़िर चौख़ांबा (दूर क्षितिज पर) बहुत ध्यान से देखने पर, क्षितिज के उस पार चौखंबा का विशाल ढांचा भी झलकता है।
चार स्तंभों की तरह खड़ा जैसे प्रकृति का कोई प्राचीन मंदिर हो। ये दूर है, हल्का धुंधला… पर उसकी मौजूदगी साफ महसूस होती है
जैसे कोई बुजुर्ग, जो कम बोलता है पर सब पर नजर रखता है। पूरा दृश्य जैसे जीवित चित्र इन सब चोटियों को एक साथ देखना…
ये कोई साधारण दृश्य नहीं था। नीचे हरे-भरे जंगल  बीच में धुंध की लहरें और ऊपर ये सफेद, चमकती चोटियाँ
ऐसा लग रहा था जैसे धरती, आकाश और समय तीनों एक फ्रेम में आ गए हों।
एक क्षण…
हम दोनों चुप थे।
कोई शब्द नहीं…
क्योंकि वहाँ शब्द थोड़े छोटे पड़ जाते हैं।  मैंने धीरे से कहा
इतनी सारी चोटियाँ… हर एक अलग… फिर भी सब एक साथ इतनी सुंदर कैसे लगती हैं?” पैसोरी ने मुस्कुरा कर जवाब दिया
क्योंकि यहाँ कोई competition नहीं है… सब बस अपने-अपने स्थान पर पूर्ण हैं।”
वहाँ खड़े-खड़े लगा  हम शहरों में छोटी-छोटी बातों पर comparison करते हैं,
और यहाँ ये हजारों साल पुराने पहाड़… बिना किसी ego के साथ खड़े हैं। कोई ये नहीं कह रहा मैं सबसे ऊँचा हूँ, मुझे देखो!
सब बस हैं… और शायद इसी में उनकी महानता है।
पांडुखोली से हिमालय को देखना, सिर्फ sightseeing नहीं है…  ये ऐसा है जैसे  आपको प्रकृति अपने सबसे निजी कमरे में ले जाकर कहे ये मेरा असली रूप है… इसे महसूस करो।
सूरज की आखिरी किरणें उन पर ऐसे गिर रही थीं, जैसे कोई साधु ध्यान में लीन हो।  मैंने मज़ाक में कहा इतना शांत है यहाँ… अगर कोई WiFi लगा दे तो लोग इसे भी खराब कर देंगे। वो हँसते हुए बोली अच्छा है नहीं है… वरना लोग यहाँ भी reels बनाने लगते।
अगले दो दिन हम वहीं रुके सुबह ध्यान, दिन में जंगल की खोज, और शाम को हिमालय से बातें। हमने भीम गद्दी देखी, अलग-अलग गुफाओं में समय बिताया, और हर जगह एक अजीब सी ऊर्जा महसूस हुई जैसे प्रकृति यहाँ सिर्फ दिखती नहीं, बात करती है।
रात को आसमान…  इतने तारे कि शहर में रहने वाला इंसान गिनते-गिनते existential crisis में चला जाए
हम दोनों अक्सर चुप रहते  वहाँ बैठकर एक बात समझ आई

                 हम शहरों में “शांति” ढूंढने के लिए meditation apps डाउनलोड करते हैं,

और यहाँ प्रकृति खुद free में वो दे रही है… बिना subscription के  तीसरे दिन जब हम लौटे, तो रास्ता वही था…
पर हम बदल चुके थे। पैसोरी ने जाते-जाते कहा  तुम्हारे अंदर अच्छा observer है… बस थोड़ा कम सोचो, ज्यादा महसूस करो। मैंने मुस्कुरा कर कहा  और तुम थोड़ा कम सिखाओ… थोड़ा जीने भी दो!  दोनों हँस पड़े। वो पाँच दिन सिर्फ यात्रा नहीं थे
वो एक अनुभव था… जहाँ पहाड़ों ने सिखाया कि ऊँचा होना क्या होता है, और मौन ने सिखाया कि गहरा होना क्या होता है।
और पांडुखोली… वो आज भी वहीं है  शांत, स्थिर… किसी अगले यात्री का इंतज़ार करती हुई।  क्योंकि कुछ जगहें ऐसी होती हैं जहाँ शब्द unnecessary हो जाते हैं
डा मधु
Previous Post

आयुर्वेदिक पैरामेडिकल कॉलेज की वार्षिक परीक्षा न होने के क्रम में छात्रों का भविष्य अंधकारमय

admin

admin

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

  • Trending
  • Comments
  • Latest
भारतीय आयुर्वेद में सिलबट्टे का महत्व

भारतीय आयुर्वेद में सिलबट्टे का महत्व

19/07/2021

उत्तर प्रदेश आयुर्वेदिक यूनानी बेरोजगार उपचारिकाओं उ प्रा लोक सेवा आयोग में बैठक संपन्न

06/06/2023
उत्तराखंड – द्रोणागिरी स्थित सुमेर पर्वत जहा से हनुमान जी ने संजीवनी बूटी की खोज की थी

उत्तराखंड – द्रोणागिरी स्थित सुमेर पर्वत जहा से हनुमान जी ने संजीवनी बूटी की खोज की थी

30/07/2021
वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के लेट लतीफी के चलते परेशान है बी ए ऍम एस के छात्र

वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के लेट लतीफी के चलते परेशान है बी ए ऍम एस के छात्र

01/09/2021

How this Nigerian woman went from aspiring developer to meeting Mark Zuckerberg

0

Celebrity Foodies: See What the Stars Are Snacking on Today

0

Jimmy Fallon’s 8 Best Hosting Moments of All Time

0

British model issues lengthy, sincere apology for cultural appropriation

0

वो पांच दिन ….

13/04/2026
आयुर्वेदिक पैरामेडिकल कॉलेज की वार्षिक परीक्षा न होने के क्रम में छात्रों  का भविष्य अंधकारमय

आयुर्वेदिक पैरामेडिकल कॉलेज की वार्षिक परीक्षा न होने के क्रम में छात्रों का भविष्य अंधकारमय

12/01/2025
400 किताबें लिखने वाले SN खंडेलवाल वृद्धाश्रम में ली अंतिम स्वास .

400 किताबें लिखने वाले SN खंडेलवाल वृद्धाश्रम में ली अंतिम स्वास .

29/12/2024
उत्तराखंड

उत्तराखंड

27/11/2024

Recent News

वो पांच दिन ….

13/04/2026
आयुर्वेदिक पैरामेडिकल कॉलेज की वार्षिक परीक्षा न होने के क्रम में छात्रों  का भविष्य अंधकारमय

आयुर्वेदिक पैरामेडिकल कॉलेज की वार्षिक परीक्षा न होने के क्रम में छात्रों का भविष्य अंधकारमय

12/01/2025
400 किताबें लिखने वाले SN खंडेलवाल वृद्धाश्रम में ली अंतिम स्वास .

400 किताबें लिखने वाले SN खंडेलवाल वृद्धाश्रम में ली अंतिम स्वास .

29/12/2024
उत्तराखंड

उत्तराखंड

27/11/2024
Rashtriya Patal

We bring you the best news magazine, personal blog, etc for you, Check our website

Follow Us

Browse by Category

  • feature
  • KOVID
  • Uncategorized
  • अंतराष्ट्रीय
  • आजमगढ़
  • उत्तरप्रदेश
  • उत्तरांचल
  • खान पान
  • खेल
  • जम्मू और कश्मीर
  • टेक्निक गुरु
  • दिल्ली
  • नारायणीयम आयुर्वेदिक स्कूल से
  • बंगाल
  • मनोरंजन
  • योजनाएं
  • राष्ट्रीय
  • लखनऊ
  • सम्पादकीय
  • सैर सपाटा
  • स्वास्थ्य
  • हिमांचल

Recent News

वो पांच दिन ….

13/04/2026
आयुर्वेदिक पैरामेडिकल कॉलेज की वार्षिक परीक्षा न होने के क्रम में छात्रों  का भविष्य अंधकारमय

आयुर्वेदिक पैरामेडिकल कॉलेज की वार्षिक परीक्षा न होने के क्रम में छात्रों का भविष्य अंधकारमय

12/01/2025
  • About
  • Advertise
  • Privacy & Policy
  • Contact

© 2021 Rashtriya Patal .

No Result
View All Result
  • होम
  • अंतराष्ट्रीय
  • राष्ट्रीय
    • उत्तरप्रदेश
  • खेल
  • मनोरंजन
  • योजनाएं
  • सैर सपाटा
  • स्वास्थ्य

© 2021 Rashtriya Patal .

Login to your account below

Forgotten Password?

Fill the forms bellow to register

All fields are required. Log In

Retrieve your password

Please enter your username or email address to reset your password.

Log In