अर्जुन (अर्जुनसद्दा) :-
अर्जुन वृक्ष का महापुरूष लोगों से सुना । इस पेड़ का फल पंचकोनी नहीं गोल था लेकिन जब भगवान श्रीराम दंडित होते थे तो लक्ष्मण उन्हें खाने के लिए लाते थे ये फल एक बार लक्ष्मण इन फलों को खाने के लिए ललचाया और उसने पांच उंगलियों को हाथ में लेकर फल पकड़ा तो भगवान श्रीराम ने अंतर्ज्ञान से समझ लिया और तब वह पंचकोनी बन गया । सुना है ऐसा एक और महापुरूष । खैर, अच्छा,
यह एक जंगली पेड़ है । कोंकण के अधिकांश स्थानों पर पाया गया । अर्जुन और अन्न एक जैसे दिखने वाले पेड़ हैं । लेकिन अर्जुन अलग है । बाहर से सफेद और अंदर से लालची अर्जुन वृक्ष की सली का रंग । दर्पण का वर्ष सूखता है तो लालची हो जाता है, जबकि अर्जुन का वर्ष सूखता है तो बाहर से सफेद ही रहता है । इन दोनों पेड़ों में यही फर्क है । वह 80 फीट लंबा होता है । अर्जुन के फूल पीले रंग के हैं । अर्जुन वृक्ष का बाहरी वर्ष सर्प के काटने की तरह वर्ष में एक बार नीचे गिरता है ।
अर्जुन वृक्ष में कड़वा, सर्दी, खांसी, पित्त, वरन, मध्यस्थता, प्रमेह, एनीमिया, हृदय, एनीमिया आदि होता है । गुण होते हैं ।
नशीली दवाओं का उपयोग :-
जब धड़कन बढ़ जाती है तो अर्जुन साल का एक चम्मच पाउडर एक कप टमाटर के रस में नियमित रूप से मिलाकर पीने से धड़कन सामान्य हो जाती है ।
हार्ट अटैक में बीस ग्राम गेहूं और तीस ग्राम गाय का घी लेकर लालची होने तक भूनें और तीन ग्राम अर्जुन पाउडर और चालीस ग्राम खादीस्गर में डालकर गर्म पानी में डालकर नस नस बना लें । इसका नियमित सेवन करने से हृदय रोग में राहत मिलती है ।
अर्जुन के पेड़ को हटाने से बर्तन को धो दें, ताकि रोपण और खोज गतिविधियों से बर्तन जल्दी ठीक हो सके ।
शहद से कंकाल पर अर्जुन चूर्ण देना चाहिए, साथ ही पाल कुचलकर घी भी डाल देना चाहिए ।
पित्त और हृदय रोग को दूर कर गाय के दूध में डालकर गाय के दूध में चीनी मिलाएं ।
तपेदिक और पित्ताशय में अदुशा के रस में अर्जुन पाउडर सूखे । ऐसा 21 बार करें । बाद में चूर्ण को शहद, घी और खादीसाकर परोसें ।
दो चम्मच खून की नल पर रात को पानी में भिगोकर सुबह पानी पियें ।
अर्जुन साल को दूध में बाँटकर जवानी में आने वाले पुटकुलों पर लेप करना चाहिए ।
रक्त वाहिकाओं का उतना ही महत्व है जितना रक्त बहने की प्रक्रिया में दिल का होता है । रक्त वाहिकाओं का अनुबंध न हो या आराम हो तो दिल अपना काम ठीक से नहीं कर सकता । अर्जुन अपने रक्त को शुद्ध करता है, इसलिए अर्जुन का वर्ष भी संधान और लेखन है । इसलिए अर्जुन के शरारत पर साल दिल को सुकून देने पर बहुत असरदार है ।













