निरंकुश शक्ति ऐसी स्थिति जिसमें किसी की भी रोजी रोटी जमीं माकन मट्टी में मिला सकती है आजमगढ़ में स्वतंत्र पत्रकार एस के दत्ता के साथ भी ऐसा ही कुछ हो गया निरंकुश शासन ने जमीदोश कर दिया एक गरीब पत्रकार की रोजी ही ढहा दी गयी उसको सुनने तक का समय नहीं दिया गया
पत्रकारिता लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है। इसकी राष्ट्रीय और सामाजिक जीवन में अहम भूमिका है। जब वह ही न्याय के लिए दर बदर भटकेगा तो समाज में सर्वहारा समाज की न्याय की मशाल को अलख कैसे देगा एक न्याय से वंचित हारा व्यक्ति टूट जाता है और वो तो टूट के बिखर जाता है जिसके साथ अन्याय के साथ रोजी भी चली गयी होती है












