सरकारी तंत्र थक चुका है। अस्पतालों का दम फूलने लगा है। जगह की कमी पड़ रही हैं। घण्टों बुलाने पर एम्बुलेंस नही आती। बेहद तक़लीफ़ पैदा करने वाली वाली तस्वीरें आ रही है। हालात की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि बुधवार को उत्तर प्रदेश के लखनऊ शहर में किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज में सैकड़ों कोरोना मरीज़ एक साथ पहुंच गए तो अस्पताल में हड़कंप मच गया।
स्पताल कर्मचारी खुद जान बचाकर छिपने लगे।घण्टों कोई इनकी सुध लेने नही आया। ये लोग घण्टों लाइन में लगे रहे और थककर ज़मीन पर बैठ गए।
फैलते संक्रमण को रोकने के लिये प्रदेशभर में लगाये गये रात्रि के लॉकडाउन/कर्फ्यू के बीच आवश्यक वस्तुओं की कालाबाजारी शुरू हो चुकी है.
सरकारी हुक्म हुआ है कोई इंडिविजुअल ऑक्सीजन नहीं ले सकता है। सरकार तय करेगी कि कौन अति गंभीर है
अब मसला ये है की आधी से ज्यादा संक्रमित घरो पे होम आइसोलेशन में है चुकी सरकारी तंत्र के पास बिस्तर ही नहीं है अब हकीमो का आदेश है बिना ससो के मारो ,अब ससो पे सिर्फ अस्पातलो का अधिकार होगा घर कृत्रिम ऑक्ससीजन विहीन रहेगा अब इस्वर द्वारा प्रद्दत हवा से ही काम चलना होगा अब ये कहावत भी चरित्रार्थ हो रही है की पेड़ कोई लगाएगा नहीं ऑक्ससीजन सभी को चाहिए
माननीय मुक्यमंत्री जी से अनुरोध है की कोई आदेश देने से पहले जरूर ये सोचे की इस आदेश का असर कहा तक जायेगा











