सब्बौ परि कृपा देखून्य वाली, मैयां छै तू पूर्णागिरि वाली,
त्यर दरबार में जू लगे उंछ कभै न जांछ खाली
(सब पर कृपा दिखाने वाली, मईया है पूर्णागिरि वाली, तेरे द्वार पर सब हैं आते, कभी न कोई जाए खाली)
मां पूर्णागिरि मंदिर उत्तराखंड के चंपावत जिले में स्थित है। चंपावत जिले की तहसील टनकपुर के पास अन्नपूर्णा शिखर पर 5,500 फीट की ऊंचाई पर स्थित यह मंदिर 108 सिद्ध पीठों में से एक माना जाता है। यह स्थान महाकाली की पीठ माना जाता है। कहा जाता है कि यहां पर माता का वक्ष गिरा था।
इसी क्षेत्र में स्थित मां पूर्णागिरि पीठ लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। मान्यता है कि दक्ष प्रजापति की पुत्री पार्वती (सती) ने अपने पति के अपमान के विरोध में दक्ष प्रजापति की ओर से आयोजित यज्ञ कुंड में स्वयं कूदकर प्राणों की आहुति दे दी थी।
इसके बाद भगवान विष्णु ने अपने चक्र से महादेव के क्रोध को शांत करने के लिए सती पार्वती के शरीर के 64 टुकड़े कर दिए। जहां-जहां उनके शरीर के टुकड़े गिरे, वहां एक शक्ति पीठ स्थापित हुआ। इसी क्रम में पूर्णागिरि शक्तिपीठ स्थल पर सती पार्वती की नाभि
गिरी थी।
भारत-नेपाल सीमा पर स्थित पूर्णागिरि धाम की तीर्थ यात्रा मात्र धार्मिक आस्था से ही नहीं, अपितु नैसर्गिक सौंदर्य के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। पूर्णागिरि धाम शारदा नदी के पास स्थित अन्नपूर्णा की चोटी पर लगभग 3000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। यहां चैत्र मास में आयोजित होने वाले मेले में उमड़ने वाली भीड़ लघु कुंभ का रूप लेती है।
एक कथन के अनुसार अंग्रेज शिकारी जिम कॉर्बेट को हुए थे दिव्य पुंज के दर्शन
पूर्णागिरि के आसपास का क्षेत्र अंग्रेज शिकारी जिम कॉर्बेट की कर्मस्थली भी रहा है। तल्लादेश क्षेत्र में वर्ष 1929 में नरभक्षी बाघ का शिकार करते समय जिम कॉर्बेट को पूर्णागिरी मंदिर के पास प्रकाश पुंज के दिव्य दर्शन हुए थे। जिम कॉर्बेट ने इस क्षेत्र में पूर्णागिरि से 12 किमी दूरी पर 1938 में टाक गांव में अपने जीवन के अंतिम नरभक्षी बाघ का शिकार किया था।
वर्तमान में पूर्णागिरि दर्शन के लिए टनकपुर रेल मार्ग से पहुंचा जा सकता है। टनकपुर सड़क मार्ग से बरेली से पीलीभीत खटीमा होकर पहुंचा जा सकता है।
टनकपुर से 16 किमी दूर स्थित भैरव मंदिर तक टैक्सी, प्राइवेट बस एवं रोडवेज बसों की नियमित सेवा के माध्यम से पहुंचा जा सकता है। भैरव मंदिर से करीब चार किमी की दूरी श्रद्धालुओं को पैदल तय करनी होती है।
ट्रेन द्वारा
पूर्णागिरि चम्पावत से 60 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। टनकपुर रेलवे स्टेशन से पूर्णागिरि तक टैक्सी और बस आसानी से उपलब्ध हैं। टनकपुर लखनऊ, दिल्ली, आगरा और कोलकाता जैसे भारत के प्रमुख स्थलों से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है।
ट्रेन टनकपुर रेलवे स्टेशन के लिए उपलब्ध होती है और पूर्णागिरि टनकपुर के साथ मोटर वाहनों से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है।
सड़क के द्वारा
पूर्णागिरि उत्तराखंड राज्य और उत्तरी भारत के प्रमुख स्थलों के साथ मोटर वाहनों से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। आईएसबीटी आनंद विहार की बसें टनकपुर, लोहाघाट और कई अन्य गंतव्यों के लिए उपलब्ध हैं, जहां से आप आसानी से स्थानीय कैब या बस तक पहुंच सकते हैं
बाय एयर
पूर्णागिरि से निकटतम हवाई अड्डा पंतनगर है जो कि उत्तराखंड राज्य के नैनीताल जिले में 160 किमी दूर स्थित है। पंतनगर हवाई अड्डे से पूर्णागिरि तक टैक्सी उपलब्ध हैं। पंतनगर एक सप्ताह में चार उड़ान दिल्ली के लिए उपलब्ध है |
उत्तराखंड – द्रोणागिरी स्थित सुमेर पर्वत जहा से हनुमान जी ने संजीवनी बूटी की खोज की थी














