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मेरी ‘सतोपंथ’ यात्रा :- उत्तराखंड के चमोली जिले में बद्रीनाथ मंदिर के करीब माना गांव से – ……भाग एक

'सत-ओ' का अर्थ है 'सत्य का' और 'पंथ' का अर्थ है 'मार्ग'। तो 'सतोपंथ' का एक साथ अर्थ है परम सत्य की ओर जाने का मार्ग।

admin by admin
22/08/2021
in Uncategorized, उत्तरांचल
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वैसे तो उत्तरांचल हिमांचल लेह लड्ढाख के सरजमीं को कई बार चूमने का अवसर मिला पर अभी तक केदारनाथ जाने का अवसर नहीं मिल पाए मेरे तमाम यात्राओं को मैंने लिपिबद्ध किया उम्मीद है आपलोगो के अंदर इन जगहों को देखने की उम्मीद जगा पाउँगा

 

MANA VILLAGE
MANA VILLAGE

सतोपन्थ, ये नाम प्रकृति प्रेमियों के साथ-साथ धार्मिक यात्रियों को बरबस अपनी ओर खींचता रहता है। समुद्र तल से ४३०० मीटर की ऊँचाई पर स्थित इस पवित्र झील को देखने व् इसमें स्नान करने हेतु प्रति वर्ष कई ट्रैकर और श्रद्धालु यहाँ तक आ पहुँचते हैं।
पुराणों के अनुसार महाभारत युद्ध के पश्चात पाण्डव अपनी अन्तिम यात्रा पर इसी मार्ग से होकर गुजरे थे। एक-एक कर पाण्डव देह त्याग करते रहे।

अन्त में धर्मराज युधिष्टिर ही स्वान के साथ पुष्पक विमान पर सवार होकर सशरीर स्वर्ग गए। इस ट्रैक पर आधारितटी सीरीज की एक C.D. मार्किट में बहुत प्रचलित है।

मैंने अपनी उत्तरांचल यात्रा के दौरानसतोपन्थ के बारे में जाना फिर टी सीरीज के सी डी देखने के बाद  मैंने मन बना ही लिया, तभी से सपना संजो लिया था कि इस ताल को देखने कभी न कभी अवश्य जाऊँगा।  इसके पूरे रास्ते में पड़ने वाले पड़ाव और पाण्डवों से उनका सीधा संबन्ध होना ही मुझे सदैव इसकी ओर आकर्षित करता आया था। पिछले वर्ष ही तय कर लिया था कि चाहे कुछ भी हो इस वर्ष सतोपंथ की यात्रा करनी है।

सतोपंथ ताल उत्तराखंड के चमोली जिले में बद्रीनाथ मंदिर के पास स्थित पानी का एक ऐसा प्राचीन निकाय है।  सतोपंथ ताल का  परिदृश्य त्रिकोणीय क्षेत्र के भीतर 4.600 मीटर (15,100 फीट) की ऊंचाई पर स्थित है।

गढ़वाल हिमालय की शक्तिशाली चोटियाँ जैसे नीलकंठ, चौखम्बा, स्वर्गारोहिणी, और बालकुन झील के पन्ना हरे पानी को घेरे हुए हैं, और जब आप ट्रेक के शिखर पर पहुँचते हैं तो उन्हें देखा जा सकता है।

हमारी  सतोपंथ ताल की ओर यात्रा बद्रीनाथ मंदिर से शुरू होती है, और आप अपनी यात्रा शुरू करने से पहले भगवान के दर्शन भी कर सकते हैं और उनका आशीर्वाद ले सकते हैं। ट्रेल के लिए आधार शिविर भारत-तिब्बत सीमा शुरू होने से पहले भारतीय क्षेत्र के अंतिम गांव सरस्वती नदी के पास माणा में है।

 

स्थानीय लोगो ने हमको बताया की आपको अपने सतोपंथ ताल ट्रेक पर एक रात ठहरने के लिए कोई स्थायी प्रतिष्ठान नहीं मिलेगा। तो, आपको अपने साथ टेंट, भोजन, खाना पकाने की सामग्री और सोने के गियर ले जाने होंगे।

बताई गई स्थानीय किंवदंतियों के अलावा, सतोपंथ ताल का ट्रेक मार्ग महाभारत में पांडवों द्वारा लिए गए मार्ग के लिए भी जाना जाता है।

पृथ्वी पर अपना समय समाप्त होने के बाद, पांचों भाई और उनकी पत्नी द्रौपदी ने माना गांव से स्वर्ग की सीढ़ियों तक पहुंचने के लिए चलना शुरू कर दिया,एक एक स्थान पे पारी पारी से वो लोग अपना

शरीर छोड़ते गए सबसे अंत तक युदिष्ठिर पहुंचे वही स्थान स्वस्र्रोहिणी था जहा से पुष्पक विमन से वो सशरीर स्वर्ग गए

पौराणिक मान्यता है कि पाण्डव जब अपनी अन्तिम यात्रा पर थे तो सर्वप्रथम द्रोपदी, उसके उपरान्त सहदेव, नकुल, अर्जुन और भीम ने इसी रास्ते पर चलते हुए अलग-अलग स्थानों पर देह त्याग किया था। चलते-चलते जहाँ भी कोई गिर पड़ता, बिना पीछे देखे बचे लोग आगे बढ़ते रहते।  जो स्वर्गारोहिणी ग्लेशियर पर माना जाता है। उनके द्वारा उठाए गए सात चरणों में से तीन को सतोपंथ ताल ट्रेक के शिखर से देखा जा सकता है अब हम अलकनंदा नदी के साथ माणा अपस्ट्रीम से चलना शुरू करते हैं, अब हम सतोपंथ ग्लेशियर

के साथ-साथ भगीरथ खड़क ग्लेशियर भी देखेंगे। बर्फ की दोनों चलती धाराएँ चौखम्बा चोटियों से बर्फ से ढकी हुयी है

शानदार प्राकृतिक नज़ारे वैसे तो बद्रीनाथ से भी दिखते हैं, लेकिन जो आनन्द ऐसे एकान्त में आता है वो वहां से नहीं।.

कुछ और आगे तक आसान रास्ते के बाद करीब सौ मीटर की सीधी उतराई उतर कर धानु ग्लेशियर के दर्शन होते हैं। इस सीधी उतराई ने ट्रैक का ट्रेलर सभी मित्रों को दिखा दिया कि इसीलिए ही सतोपन्थ कठिन ट्रैक की श्रेणी में आता है।

धानु ग्लेशियर फट कर एक दैत्य रूप में मुहँ बायें सामने था, और उसके अन्दर से प्रचंड वेग से बहती अलकनन्दा को देखते ही रोहें खड़ी हो जानी स्वाभाविक थी।

मेरी नजर में किसी भी ट्रैक पर सबसे खतरनाक कोई क्षेत्र होता है तो वो या तो भू-स्खलित क्षेत्र होता है, या फिर ग्लेशियर क्षेत्र होता है। जरुरत से ज्यादा ध्यान और सावधानी से इनको पार करना चाहिए। कोशिश करनी चाहिए कि बिना रुके इनको पार कर लो, कब ऊपर से पत्थर या मलवा आ जाए कुछ नहीं कह सकते। ऐसे ही ग्लेशियर में कब दरार पड़ जाए कुछ नहीं मालूम।

MADHU SUDAN NAIR
MADHU SUDAN NAIR

मधुसुधन नायर

यात्रा का शेष भाग ……………..

मेरी ‘सतोपंथ’ यात्रा :- उत्तराखंड के चमोली जिले में बद्रीनाथ मंदिर के करीब माना गांव से – ……भाग दो

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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