प्रयागराज :- संगम नगरी के जयंतीपुर इलाके में हेम सिंह अकेले ही रहते थे. कुछ वर्ष पहले उनकी बेटी और पत्नी की मृत्यु हो गई थी. बता दें कि वे हाईकोर्ट में ज्वाइंट रजिस्ट्रार के पद पर तैनात थे. जबकि एक हफ्ते पहले वे कोरोना की चपेट में आए गए थे. कोरोना ग्रसित होने के बाद हेम सिंह ने अपने मित्र सिराज को फोन कर सारी जानकारी दी.
दोस्ती से बड़ा कोई धर्म नहीं होता और इंसानियत से बड़ा कोई मजहब नहीं होता ये साबित हुआ है ये देखने को मिला प्रयागराज में जहा हाई कोर्ट के जॉइंट रजिस्ट्रार हेम सिंह को जब कोरोना हुवा तो उनके दोस्त सिराज ने बहुत मसक्कल के बाद उनको प्रयागराज के एक प्राइवेट हॉस्पिटल में उनको भर्ती कराया जहा इलाज के दौरान हालत ख़राब होने के बाद उनकी मौत हो गयी तब उनके दोस्त सिराज उनके घर सहित उनके रिस्तेदार को फ़ोन करके मृत्यु का समाचार बता अंतिम संस्कार हेतु बुलाया तो रिस्तेदारो ने कोविड का हवाला देकर आने से इंकार कर कहा की चुकी आप सब देख रहे आपही अंतिम संस्कार करा दीजिये ज्ञात रहे ही १९ को हेम सिंग को गले में प्रॉब्लम शुरू हुयी एव साथ ही साथ ऑक्सीजन लेवल कम होने तो अस्पताओं की गणेश परिक्रमा शुरू हो गयी अंततः गत्वा यश हॉस्पिटल प्रयागराज में दो लाख देकर भर्ती कराया २२ तारीख तक तबियत में सूधार आया किन्तु २३ तारीख को उनकी मृत्यु हो गयी परिवारजन जन न आये तो दोस्ती का फ़र्ज़ निभाते हुए उनके मित्र सिराज ने ही उनका अंतिम संस्कार विधि विधान से किया
दोस्त की कोरोना से हुई मौत के बाद ऐसा याराना पेश किया है कि हर कोई दोनों की दोस्ती की दाद देने मे जुट गया है. जब अपनों ने मु्ंह मोड़ा तब मुस्लिम दोस्त ने 400 किलोमीटर दूर जाकर शव को मुखाग्नि दे अपने दोस्त को अंतिम विदाई दी. दुनिया में कुछ रिश्ते ऐसे हैं जो हमें ईश्वर की तरफ से नहीं मिलते बल्कि उन्हें हम खुद अपनी जिंदगी के लिए चुनते हैं. ऐसे ही दोस्ती की मिसाल पेश की है इटावा के चौधरी सिराज अहमद ने जिन्होंने न सिर्फ कोरोना से जान गंवाने वाले अपने दोस्त को कंधा दिया बल्कि मुखाग्नि भी दी.
वहीं हेम सिंह के करीबी और अपर शासकीय अधिवक्ता प्रथम बशारत अली खान ने बताया कि हेम सिंह ने पूर्व डीजीपी आनंद लाल बनर्जी की सगी बहन माला बनर्जी से शादी की थी. वह भी हाईकोर्ट में असिस्टेंट रजिस्ट्रार थीं और डेढ़ साल पहले उनका निधन हो गया. तीन दिन पहले कोरोना से सगे साले के इंतकाल के कारण घर पर ही क्वारंटीन बशारत अली ने बताया कि हेम सिंह के कई रिश्तेदारों और परिचितों को फोन और व्हाट्सएप पर सूचना दी लेकिन कोई शव लेने को तैयार नहीं हुआ. हेम सिंह छोटी नदियां बचाओ अभियान से भी जुड़े थे










