• About
  • Advertise
  • Privacy & Policy
  • Contact
Rashtriya Patal
Advertisement
  • होम
  • अंतराष्ट्रीय
  • राष्ट्रीय
    • उत्तरप्रदेश
  • खेल
  • मनोरंजन
  • योजनाएं
  • सैर सपाटा
  • स्वास्थ्य
No Result
View All Result
  • होम
  • अंतराष्ट्रीय
  • राष्ट्रीय
    • उत्तरप्रदेश
  • खेल
  • मनोरंजन
  • योजनाएं
  • सैर सपाटा
  • स्वास्थ्य
No Result
View All Result
Rashtriya Patal
No Result
View All Result
Home feature

ड्रैगन फ्रूट की खेती करना शुरू कीजिये मुनाफा कमाइए

इम्युनिटी बढ़ता है , कोलेस्ट्रॉल घटता है ,हीमोग्लोबिन बढ़ता है ,

admin by admin
09/07/2021
in feature, खान पान
1 0
0
ड्रैगन फ्रूट की खेती करना शुरू कीजिये मुनाफा कमाइए
0
SHARES
39
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter
0
0

 ड्रैगन फ्रूट एक मेडिसिनल प्लांट है। यह इम्यूनिटी बूस्टर का काम करता है। यही वजह है कि पिछले कुछ सालों से इसकी डिमांड बढ़ी है। खास करके कोविड संक्रमण के बाद से काफी संख्या में लोग इसके प्रोडक्शन के फील्ड में हाथ आजमा रहे हैं। गुजरात के भावनगर के रहने वाले रमेश मकवाना ने दो साल पहले पारंपरिक खेती छोड़कर ड्रैगन फ्रूट की खेती शुरू की थी। आज वे करीब 2.5 एकड़ जमीन पर ड्रैगन फ्रूट की खेती कर रहे हैं। उनके पास तीन तरह की वैरायटी हैं। इसकी सप्लाई वे देशभर में कर रहे हैं। इससे इस साल 3.5 लाख से ज्यादा का मुनाफा उन्होंने हासिल किया है।

सोशल मीडिया पर मिली थी जानकारी
सुशील एक किसान परिवार से ताल्लुक रखते हैं। वे पहले से पारंपरिक खेती करते आ रहे हैं। हालांकि उसमें कुछ खास आमदनी नहीं होती थी। मुश्किल से परिवार का खर्च निकल पाता था। दो साल पहले उन्हें सोशल मीडिया पर ड्रैगन फ्रूट के बारे में जानकारी मिली। इसके बाद उन्होंने इसके बारे में और अधिक जानकारी जुटाने की कोशिश की। यूट्यूब पर इससे रिलेटेड कई वीडियो देखे। कुछ दिनों बाद किसी परिचित से उन्हें पता चला कि उत्तर प्रदेश में इसकी अच्छी खेतीहो सकती है। .

ड्रैगन फ्रूट की खेती के करीब 15 महीने बाद फल निकलने लगता है। हालांकि प्रोडक्शन बहुत ज्यादा नहीं होता है। क्योंकि प्लांट अभी पूरी तरह से मैच्योर नहीं हुए होते हैं। इस साल पहली बार मेरे खेत से फ्रूट निकलना शुरू हुए तो लोकल मार्केट के साथ ही बाहर से भी लोग खरीदारी के लिए आए। एक फ्रूट की कीमत 150-250 रुपए के बीच होती है।

हले ऐसा माना जाता था कि ड्रैगन फ्रूट की खेती भारत में नहीं हो सकती है। यह अमेरिका, वियतनाम, थाईलैंड जैसे देशों से भारत में आता था, लेकिन पिछले कुछ सालों से भारत में भी बड़े लेवल पर इसका प्रोडक्शन हो रहा है। गुजरात तो इसका हब है। यहां सरकार ने इसका नाम कमलम रखा है। इसके अलावा यूपी, एमपी, केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र में भी इसकी खेती होने लगी है। बरसात को छोड़कर पूरे साल ड्रैगन फ्रूट के पौधे लगाए जा सकते हैं। मार्च से जुलाई के बीच प्लांटिंग करना ज्यादा बेहतर होता है।

पौधे अच्छे किस्म के होने चाहिए। ग्राफ्टेड प्लांट हो तो ज्यादा बेहतर होगा, क्योंकि उसे तैयार होने में समय कम लगता है। प्लांटिंग के बाद नियमित रूप से कल्टीवेशन और ट्रीटमेंट की जरूरत होती है। इसके सहारे के लिए सीमेंट के खंभे की भी जरूरत होती है। एक खंभे के साथ तीन प्लांट लगाए जा सकते हैं। जैसे-जैसे प्लांट बढ़ता है उसे रस्सी से बांधते जाते हैं।

करीब एक सवा साल बाद प्लांट तैयार हो जाता है। दूसरे साल से फ्रूट निकलने लगते हैं। हालांकि तीसरे साल से ही अच्छी मात्रा में फल का प्रोडक्शन होता है। इसके लिए टेम्परेचर 10 डिग्री से कम और 40 डिग्री के बीच हो तो प्रोडक्शन बढ़िया होता है। इसकी खेती के लिए किसी विशेष किस्म की जमीन की जरूरत नहीं होती है। बस हमें इस बात का ध्यान रखना होता है कि पानी या जलजमाव वाली जगह नहीं हो। महीने में एक बार सिंचाई की जरूरत होती है।

कहां से ले सकते हैं ट्रेनिंग ?

इंडियन काउंसिल फॉर एग्रीकल्चर रिसर्च (ICAR) जो देश के कई शहरों में स्थित है, वहां से भी ली जा सकती है। ड्रैगन फ्रूट की खेती करने वाले किसान भी इसकी ट्रेनिंग देते हैं। इसके अलावा इंटरनेट की मदद से भी जानकारी जुटाई जा सकती है। कई सरकारी और प्राइवेट संस्थान सेमिनार और वर्कशॉप भी आयोजित करवाते रहते हैं।

सालाना 8 से 10 लाख रुपए तक कर सकते हैं कमाई
चूंकि ड्रैगन फ्रूट की खेती शुरुआत में थोड़ी महंगी होती है। इसलिए आपको बजट का खास ध्यान रखना होगा। पौधों की कीमत के साथ ही इसकी मेंटेनेंस में भी पैसे लगते हैं। इस लिहाज से अगर बजट कम हो तो कम पौधों के साथ शुरुआत करनी चाहिए। बाद में जब प्रोडक्शन होने लगे तो खेती का दायरा बढ़ाया जा सकता है। एक बार प्लांटिंग करने के बाद करीब 25 साल तक यह फल देता है। यानी कुल मिलाकर जो खर्च लगता है वह शुरुआत में ही लगता है। बाद में सिर्फ मेंटेनेंस का खर्च रह जाता है।

आज कल बड़े-बड़े सुपर मार्केट में ड्रैगन फ्रूट की डिमांड है। कई बड़ी दवा कंपनियां भी थोक में इसकी खरीदारी करती हैं। बड़े शहरों के साथ ही छोटे शहरों में भी लोग इसे अपना रहे हैं। कोरोना में ज्यादातर लोगों ने इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए इसका इस्तेमाल करना शुरू किया है। एक फ्रूट की कीमत 100 से 300 रुपए तक होती है। यह लोकेशन और फ्रूट की साइज के हिसाब से होती है। एक एकड़ जमीन पर इसकी खेती से सालाना 10 टन फ्रूट का उत्पादन हो सकता है। जिससे प्रति टन 8-10 लाख रुपए की कमाई की जा सकती है। अगर आप खेती के साथ ही इसकी नर्सरी लगाते हैं और प्रोसेसिंग का काम करते हैं तो और अधिक मुनाफा कमा सकते हैं। आज-कल बड़े लेवल पर इसकी प्रोसेसिंग के बाद सॉस, जूस, आइसक्रीम जैसे प्रोडक्ट बनाए जा रहे हैं।

Previous Post

आजमगढ़ :- मनचलो को आई लव यू बोलना भरी पड़ा पहुंचे हवालात

Next Post

चंपत राय एव डॉ अनिल मिश्र को भी ट्रस्ट समिति से हटाया जा सकता है..

admin

admin

Next Post
चंपत राय एव डॉ अनिल मिश्र को भी ट्रस्ट समिति से हटाया जा सकता है..

चंपत राय एव डॉ अनिल मिश्र को भी ट्रस्ट समिति से हटाया जा सकता है..

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

  • Trending
  • Comments
  • Latest
भारतीय आयुर्वेद में सिलबट्टे का महत्व

भारतीय आयुर्वेद में सिलबट्टे का महत्व

19/07/2021

उत्तर प्रदेश आयुर्वेदिक यूनानी बेरोजगार उपचारिकाओं उ प्रा लोक सेवा आयोग में बैठक संपन्न

06/06/2023
उत्तराखंड – द्रोणागिरी स्थित सुमेर पर्वत जहा से हनुमान जी ने संजीवनी बूटी की खोज की थी

उत्तराखंड – द्रोणागिरी स्थित सुमेर पर्वत जहा से हनुमान जी ने संजीवनी बूटी की खोज की थी

30/07/2021
वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के लेट लतीफी के चलते परेशान है बी ए ऍम एस के छात्र

वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के लेट लतीफी के चलते परेशान है बी ए ऍम एस के छात्र

01/09/2021

How this Nigerian woman went from aspiring developer to meeting Mark Zuckerberg

0

Celebrity Foodies: See What the Stars Are Snacking on Today

0

Jimmy Fallon’s 8 Best Hosting Moments of All Time

0

British model issues lengthy, sincere apology for cultural appropriation

0

वो पांच दिन ….

13/04/2026
आयुर्वेदिक पैरामेडिकल कॉलेज की वार्षिक परीक्षा न होने के क्रम में छात्रों  का भविष्य अंधकारमय

आयुर्वेदिक पैरामेडिकल कॉलेज की वार्षिक परीक्षा न होने के क्रम में छात्रों का भविष्य अंधकारमय

12/01/2025
400 किताबें लिखने वाले SN खंडेलवाल वृद्धाश्रम में ली अंतिम स्वास .

400 किताबें लिखने वाले SN खंडेलवाल वृद्धाश्रम में ली अंतिम स्वास .

29/12/2024
उत्तराखंड

उत्तराखंड

27/11/2024

Recent News

वो पांच दिन ….

13/04/2026
आयुर्वेदिक पैरामेडिकल कॉलेज की वार्षिक परीक्षा न होने के क्रम में छात्रों  का भविष्य अंधकारमय

आयुर्वेदिक पैरामेडिकल कॉलेज की वार्षिक परीक्षा न होने के क्रम में छात्रों का भविष्य अंधकारमय

12/01/2025
400 किताबें लिखने वाले SN खंडेलवाल वृद्धाश्रम में ली अंतिम स्वास .

400 किताबें लिखने वाले SN खंडेलवाल वृद्धाश्रम में ली अंतिम स्वास .

29/12/2024
उत्तराखंड

उत्तराखंड

27/11/2024
Rashtriya Patal

We bring you the best news magazine, personal blog, etc for you, Check our website

Follow Us

Browse by Category

  • feature
  • KOVID
  • Uncategorized
  • अंतराष्ट्रीय
  • आजमगढ़
  • उत्तरप्रदेश
  • उत्तरांचल
  • खान पान
  • खेल
  • जम्मू और कश्मीर
  • टेक्निक गुरु
  • दिल्ली
  • नारायणीयम आयुर्वेदिक स्कूल से
  • बंगाल
  • मनोरंजन
  • योजनाएं
  • राष्ट्रीय
  • लखनऊ
  • सम्पादकीय
  • सैर सपाटा
  • स्वास्थ्य
  • हिमांचल

Recent News

वो पांच दिन ….

13/04/2026
आयुर्वेदिक पैरामेडिकल कॉलेज की वार्षिक परीक्षा न होने के क्रम में छात्रों  का भविष्य अंधकारमय

आयुर्वेदिक पैरामेडिकल कॉलेज की वार्षिक परीक्षा न होने के क्रम में छात्रों का भविष्य अंधकारमय

12/01/2025
  • About
  • Advertise
  • Privacy & Policy
  • Contact

© 2021 Rashtriya Patal .

No Result
View All Result
  • होम
  • अंतराष्ट्रीय
  • राष्ट्रीय
    • उत्तरप्रदेश
  • खेल
  • मनोरंजन
  • योजनाएं
  • सैर सपाटा
  • स्वास्थ्य

© 2021 Rashtriya Patal .

Login to your account below

Forgotten Password?

Fill the forms bellow to register

All fields are required. Log In

Retrieve your password

Please enter your username or email address to reset your password.

Log In