सनातन धर्म की राजधानी कही जाने वाली काशी से धर्म का अंतराष्ट्रीय स्तर पर व्यवसायीकरण करने की शुरुआत “धार्मिक मॉल” बना के की जा चुकी है।।
श्री काशी विश्वनाथ मंदिर का संचालन कैसे किया जाएगा और मन्दिर से “कमाई” कैसे होगी, इसके लिए मन्दिर प्रशासन ने एक ब्रिटिश कंपनी “अर्नेस्ट एंड यंग” का चयन किया है।।
अब धार्मिक संस्थाओं के संचालन की रूप रेखा हमारे वेदों और शस्त्रों के जानकार जिनकी “धर्म में आस्था” है की जगह वो तय करेंगे जिनकी सिर्फ़ “अर्थ में आस्था” है।।
नैतिकता के अतिरिक्त कानूनी रूप से भी 1983 में सरकार द्वारा मन्दिर के सरकारी करण के समय बनाये गए काशी विश्वनाथ मंदिर अधिनियम 1983 को भी तांक पर रख दिया गया है।।
जिन ब्रिटिशर्स ने हमारे ऊपर सैकड़ों वर्षों तक राज किया, जिन्होंने हमारी वैदिक शिक्षा व्यवस्था को जड़ से समाप्त कर दिया वहीं ब्रिटिशर्स अब हमारे मन्दिरों के संचालन की योजना भी बनाएंगे।
काशी में जो थोड़ा बहुत धर्म बचा था उसको भी समाप्त करने की दिशा में षड्यंत्र चल रहें हैं… पहले मुस्लिम मजदूरों लगा कि हमारे पौराणिक मन्दिरों को तोड़ा गया, फ़िर उनकी जगह गेस्ट हाउस और दुकानें बनाई गई और अब एक विदेशी कंपनी से धर्म की इस दुकान से कमाई कैसे हो इसकी योजना बनवाई जा रही है।।
सनातनी जो राजनैतिक समर्थक बने घूम रहें हैं, जब तक सनातन धर्म को गर्त में ले जाने वाले इस षड्यंत्र को समझेंगे तब तक बचाने के लिए कुछ बचेगा नहीं, इसलिए समय रहते चेत जाइये, राजनैतिक दल आज हैं कल नहीं रहेंगे, पर हमारा धर्म रहेगा, यदि हम इसका संरक्षण कर सके तो।
लेखक :- Rishi Kumar Jhingran(ऋषि) की फेसबुक वाल से …..












