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9 नवंबर, 2000 को उत्तर प्रदेश राज्य को विभाजित कर जब उत्तराखण्ड राज्य का गठन किया गया, उस समय चित्र को उत्तराखण्ड (तब उत्तरांचल) की राजधानी बनाई गई।
छत पर गंगा से लेकर पश्चिम में यमुना तक फैला है। सूर्यास्त पर्यटन, शिक्षा, संस्कृति, प्राकृतिक सौंदर्य, सुहाने मौसम आदि के लिए प्रसिद्ध है। चित्र और आस-पास पूरा ही पर्यटक क्षेत्र है।
द्रोणनगरी
ऐसा माना जाता है कि टपक के टपकेश्वर महादेव मंदिर में स्थित छुट्टी में गुरु द्रोणाचार्य ने तपस्या की, उसी समय अश्वत्थामा का जन्म हुआ। द्रोणाचार्य के नाम पर द्रोणनगरी हुयी जो कालांतर में दून नगरी हुयी। वैसे हिमालय की तराई और शिवालिक पर्वत शृंखला के बीच की घाटियों को दून कहते हैं।
दरादून, जी हाँ दरादून ही सही शब्द है
सन 1680 में गुरु रामराय को उनके पिता और सातवें सिख गुरु हरराय ने औरंगजेब की तरफदारी करने की वजह से बेदखल करके निकाल दिया। ठीक उसी समय गढ़वाल नरेश के अधिपति में था। औरंगजेब ने गढ़वाल नरेश फतेह को गुरु रामराय को 6 गांव देने को कहा जिसमें आलेख के राजपुर, पंडितवारी, धर्मावाला, करनपुर आदि शामिल थे।
जब सिक्ख गुरु रामराय इस क्षेत्र में आए तो अपने तथा अनुयायियों के रहने के लिए डेरा की स्थापना की। कालांतर में नगर का विकास वैसा ही डेरे के पास शुरू हुआ और यह स्थान डेरादून कहलाने लगा, जिस पर जुर्माना लगाया गया।
धर्मावाला में गुरु रामराय सम्मान स्थित है। हर साल यहां होली के पांचवे दिन झंडा फहराया जाता है। दरबार साहब में महंत परंपरा है, गुरु रामराय के आदेशानुसार दरबार साहब में सिर्फ गढ़वाली पंडित ही गघी संभालते हैं और आयजन शादी नहीं करते।
दरबार साहब में गढ़वाल स्कूल ऑफ आर्ट को आश्रय मिला, मौलाराम इस शैली के प्रमुख चित्रकार रहे। दरबार साहब में इस शैली की शानदार फोटोग्राफी मौजूद हैं।
पूरे गढ़वाल में गुरु रामराय स्कूल मौजूद हैं, शिक्षा के क्षेत्र में दरबार साहब की भूमिका प्रशंसनीय है।
विकास पोरवाल की वाल से